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श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़

26 जून 2027 · शनिवार ज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमी

श्री कालभैरव कालाष्टमी व्रत आषाढ़ में कब है ?

संक्षिप्त उत्तर

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ 2027 कब है?

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ 2027 शनिवार, 26 जून 2027 को मनाई जाएगी। श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ की तिथि ज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमी है। श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:10 – 07:54 तक रहेगा।

दिनांक26 जून 2027
तिथिज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमी
पूजा मुहूर्त05:10 – 07:54
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमीआषाढ़ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान काल भैरव
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रपूर्व भाद्रपदआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ का महत्व और उत्सव

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ ज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण सप्तमी
नक्षत्रपूर्व भाद्रपद
योगआयुष्मान
करणविष्टि
ऋतुवर्षादक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:34 – 04:22 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:10 – 07:54 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:33 – 12:28 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 17:02 – 17:57 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:04 – 19:16 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:35 – 10:18 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 26 Jun 01:24 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:34–04:22
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:10–07:54
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:33 – 12:28
तिथि समाप्त 26 Jun 01:24 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:04–19:16

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ — महत्व, कथा और परंपरा

आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी या भैरवाष्टमी कहा जाता है, जब भगवान शिव के कालरूप श्री कालभैरव की विशेष आराधना की जाती है। वर्ष भर में बारह कालाष्टमी व्रत आते हैं, परन्तु माघ मास की कालाष्टमी को सर्वोच्च महत्त्व मिलता है। इस पावन तिथि पर भक्त श्री भैरव के आठ स्वरूपों—असितांग, चंड, रूरू, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण और संहार—का विधिपूर्वक पूजन करते हैं, जिनमें बटुक भैरव की उपासना विशेष प्रचलित है। प्रातः स्नान के बाद तिल, सरसों के तेल का दीपक, काले तिल, पुष्प और बिल्वपत्र अर्पित कर भैरव स्तुति की जाती है। संध्या समय कालभैरव अष्टक का पाठ कर प्रसाद वितरित किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से समस्त भय दूर होते हैं और साधक को निर्भय, संतुलित जीवन का वरदान प्राप्त होता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान काल भैरव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)ज्येष्ठ
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन ज्येष्ठ माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ 26 जून 2027 (शनिवार) को है।
श्री कालभैरव कालाष्टमी आषाढ़ ज्येष्ठ, कृष्ण सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।