अमावस्या के अगले दिन प्रकट होने वाला नवचन्द्र श्रावण मास का शुभारम्भ सूचित करता है। प्रारम्भिक पाँच-दस मिनट ‘प्रतिपदा क्षण’ माने जाते हैं, जब दीप, गंध, अक्षत और शीतल जल से चन्द्रमा को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। व्रती दिन-भर निर्जल रहकर साँझ को सफेद वस्त्र धारण करते हैं, खीर-मिष्ठान चढ़ाकर ‘ॐ सोमाय नमः’ जपते हैं और चन्द्रदर्शन के पश्चात उपवास तोड़ते हैं। मान्यता है कि पहली चाँद की यह झलक शीतलता, स्थिर निर्णय-शक्ति और पारिवारिक कल्याण का आशीर्वाद देती है।