भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला कालाष्टमी कालभैरव की आराधना का विशेष दिन है। वर्षा कम होने के साथ ही मार्ग साफ़ होने के इस काल में भक्त प्रातः स्नान कर सरसों-तेल का दीप, काले तिल, गुलाल और आक के पुष्प अर्पित करते हैं। भैरवनाथ की प्रिय सवारी कुत्ता है, इसलिए इस दिन कुत्तों को भोजन कराना अनिवार्य माना गया है; इससे राहु-केतु सहित नकारात्मक ग्रहदोष शांत होते हैं। नारद पुराण बताता है कि कालाष्टमी का व्रत और दुर्गा-भैरव पूजा साधक के दुख-द्वेष दूर कर, मनोकामनाएँ पूरी करते हैं और घर में स्थायी सुख-समृद्धि लाते हैं। दशदिग्पाल स्वरूप भैरव जी सभी दिशाओं से रक्षा कर उपासक के जीवन में निर्भयता और तेज का प्रकाश भर देते हैं।