भाद्रपद अमावस्या के अगले दिन दिखने वाली नन्ही चाँद-रेखा को भाद्रपद चन्द्र दर्शन कहा जाता है। सावन की उमस कम हो चुकी होती है, आसमान साफ़ रहने लगता है, इसलिए सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिम क्षितिज पर दिखाई देने वाला नवचन्द्रमा विशेष सुबोध दिखाई देता है। परम्परा है कि प्रथम दर्शन पर अर्घ्य देते हुए “ॐ सोमाय नमः” जपें और अक्षत, दुग्ध-मिश्रित जल चढ़ाएँ। शास्त्र कहते हैं कि चन्द्रदर्शन भाग्य, शांति और समृद्धि का सूचक है; जिनकी कुंडली में चन्द्र मंद हो, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। व्रती दिनभर संयम रखते हैं और चन्द्रमा को देखकर फलाहार से व्रत खोलते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मानसिक अशांति, नकारात्मकता व रोगों का क्षय होता है और जीवन में सौभाग्य तथा शीतल संतुलन का प्रवेश होता है।