हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in

अष्टमी रोहिणी

4 सितंबर 2026 · शुक्रवार श्रावण, कृष्ण अष्टमी

भाद्रपद माह 2026 में अष्टमी रोहिणी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

अष्टमी रोहिणी 2026 कब है?

अष्टमी रोहिणी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। अष्टमी रोहिणी की तिथि श्रावण, कृष्ण अष्टमी है। अष्टमी रोहिणी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:40 – 08:10 तक रहेगा।

दिनांक4 सितंबर 2026
तिथिश्रावण, कृष्ण अष्टमी
पूजा मुहूर्त05:40 – 08:10
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, कृष्ण अष्टमीभाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्ररोहिणीहर्षण
संक्षिप्त परिचय

अष्टमी रोहिणी का महत्व और उत्सव

अष्टमी रोहिणी श्रावण, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण अष्टमी
नक्षत्ररोहिणी
योगहर्षण
करणबालव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

अष्टमी रोहिणी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:04 – 04:52 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:40 – 08:10 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:31 – 12:22 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:33 – 17:23 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:26 – 18:38 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:22 – 11:57 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 04 Sep 02:25 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:04–04:52
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:40–08:10
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:31 – 12:22
तिथि समाप्त 05 Sep 12:13 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:26–18:38

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

अष्टमी रोहिणी — महत्व, कथा और परंपरा

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी जब रोहिणी नक्षत्र से योग बनाती है, वही पावन दिन अष्टमी-रोहिणी कहलाता है। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में इसी अवसर पर कृष्ण जन्मोत्सव “श्री जयंती” हर्षोल्लास से मनाया जाता है। अब वर्षा हल्की पड़ने लगी होती है, धान के खेत लहराते हैं और शरद की उजली धूप आकाश में झलकने लगती है, पर्यावरण स्वयं उत्सव का स्वर रच देता है। भोर में स्नान कर भक्त श्वेत या पीले वस्त्र पहनते, बाल-गोपाल का पंचामृत-अभिषेक करते और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108-बार जप करते हैं। गुरुवायूर तथा उडुपी के मंदिरों में सजे हाथियों की झाँकी, उरियाडी (मटकी-फोड़) और छप्पन-भोग की आरती दिन-भर चलती है। रात्रि-पूजा के बाद उपवास पंचामृत-पायसम से खोला जाता है। श्रद्धा है कि इस योग में श्रीकृष्ण की आराधना विद्या, पारिवारिक सौहार्द और अन्न-समृद्धि का आशीर्वाद देती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

अष्टमी रोहिणी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, कृष्ण अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)श्रावण
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन श्रावण माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

गूगल पर भक्ति सरोवर को पसंदीदा स्रोत बनाएं

1गूगल पर खोजें → 2हमारा लिंक ढूँढें, ⋮ मेनू दबाएं → 3"More from this site" चुनें पसंदीदा स्रोत बनाएं →
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में अष्टमी रोहिणी 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को है।
अष्टमी रोहिणी श्रावण, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।