आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष षष्ठी को स्कन्द षष्ठी कहा जाता है। वर्षा का पहला दौर धरती को हरियाली से ढक देता है, और इसी नई सजी धरा पर भगवान कार्तिकेय की उपासना का यह दिन साधकों को विशेष पुण्य देता है। मान्यता है कि इस तिथि पर “देव सेनापते स्कन्द कार्तिकेय भवोद्भव, कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते” मन्त्र का जप करने से ऊँचे योग फलित होते हैं और संतान तथा परिवार से जुड़े क्लेश शांत होते हैं। कार्तिकेय जी को समर्पित होने के कारण इसे कौमारिकी षष्ठी भी कहा जाता है। व्रती बरगद के पत्ते, नीले पुष्प, दूध और गुड़ अर्पित कर भगवान का अभिषेक करते हैं। भरोसा है कि इस व्रत से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, गृहकलह मिटता है और जीवन में साहस व प्रसन्नता का संचार होता है।