आषाढ़ मास बारिश का पहला महीना माना जाता है। धरती सोंधी सुगंध से महकती है। इसी महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि साधकों को विशेष फल देती है। मान्यता है कि जल-वर्षा के इस काल में शिवलिंग पर जलाभिषेक करना प्रकृति के प्रवाह के साथ तादात्म्य बनाता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। इस दिन व्रत रखने तथा दूध, शहद, बिल्वपत्र और गंगाजल से अभिषेक करने से काम, क्रोध, लोभ व मोह के बंधन ढीले पड़ते हैं। पति-पत्नी के बीच उत्पन्न समस्याएँ भी शांत होती हैं। शिव पुराण बताता है कि स्त्री-पुरुष दोनों यह सरल व्रत करके अपनी मनोकामनाएँ पूरी कर सकते हैं। संध्या बेला में दीया जलाकर शिव चालीसा का पाठ करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।