आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी को मासिक दुर्गाष्टमी कहा जाता है। इस दिन माता दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि मान्यता है कि इसी तिथि पर देवी ने दुर्गम नामक असुर का अंत किया था। साधक प्रातः स्नान कर लाल पुष्प, धूप, दीप, चंदन और अक्षत अर्पित करके माँ का आह्वान करते हैं। दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यन्त शुभ माना गया है। साथ ही “सर्व मंगलाय मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमस्तुते” मन्त्र का १०८ बार जप करने से देवी प्रसन्न होती हैं। विश्वास है कि इस साधना से भय दूर होता है, स्वास्थ्य सुधरता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।