आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। देवी भागवत बताता है कि वर्ष में चार नवरात्रियाँ होती हैं; चैत्र और आश्विन की खुली नवरात्रि में माँ के नौ रूपों की पूजा होती है, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त कहा जाता है। माघ की गुप्त नवरात्रि उत्तर भारत में प्रसिद्ध है, पर आषाढ़ की नवरात्रि दक्षिण भारत में अधिक मनाई जाती है। इन नौ दिनों में उपवास रख-कर प्रतिपदा से नवमी तक सुबह-शाम माँ दुर्गा का आवाहन किया जाता है। साधक दस महाविद्याओं—काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला—का क्रम से पूजन-जप करते हैं। विश्वास है कि इस गुप्त साधना से आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।