आषाढ़ मास की अमावस्या के अगले दिन जब पतला सा श्वेत अर्धचन्द्र आकाश में झलकता है, उसे चन्द्र दर्शन कहा जाता है। हिंदू परम्परा में यह क्षण अत्यन्त शुभ माना गया है। मान्यता है कि पहली बार दिखाई देने वाले चन्द्रमा को अर्घ्य देकर, चावल-दूध से पूजन करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है। चन्द्रदेव नवग्रहों में मन और जल का प्रतीक हैं; उनका तेज धरती पर ज्वार-भाटे से लेकर मानव मन तक गहरा प्रभाव डालता है। इस दिन व्रत रखकर चन्द्रमा के मंत्र जपने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो श्रद्धा से चन्द्र दर्शन करता है, उसे सौभाग्य, मधुर संबंध और मानसिक संतुलन का वरदान मिलता है।