हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ वर्ष का चौथा महीना है। इस मास की अमावस्या, जो इस वर्ष 9 जुलाई शुक्रवार को है, दान-पुण्य और पितृ-शांति के लिए बहुत फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों या तीर्थ-स्थलों पर स्नान करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। श्राद्ध, तर्पण और दीपदान करके पितरों की आत्मा को शांति देने का विधान है। घर के द्वार पर या किसी वृक्ष-तले चींटियों को शक्कर मिला आटा डालना पाप-क्षालन का सरल उपाय माना जाता है। पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीना कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहलाती है, पर आषाढ़ की अमावस्या को विशेष नाम ‘हलहारिणी’ या ‘अषाढ़ी अमावस्या’ भी दिया गया है। ऐसे धार्मिक कार्य साधक के जीवन में सुख-शांति और शुभ फल लाते हैं।