चैत्र मास की पूर्णिमा के पश्चात प्रतिपदा तिथि से वैसाख माह का आरंभ होता है। भारतीय पंचांग के अनुसार वैसाख वर्ष का दूसरा मास है। इसका नाम विशाखा नक्षत्र से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इसे वैसाख कहा गया है। वसंत ऋतु के इस समय में वातावरण में स्थिरता और तप का भाव दिखाई देता है, जो साधना और पुण्य कर्मों के लिए उपयुक्त माना गया है। वैसाख माह को दान, स्नान और धर्मकर्म का विशेष मास माना जाता है। इस अवधि में भगवान विष्णु की माधव रूप में पूजा की जाती है और उन्हें तुलसीपत्र अर्पित करने का विधान है। इसी माह भगवान परशुराम और भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। वर्ष में केवल एक बार श्री बांके बिहारी जी के चरण दर्शन भी वैसाख माह में ही होते हैं। अक्षय तृतीया जैसे प्रमुख व्रत और पर्व इसी मास को विशेष पुण्यदायी बनाते हैं।