मार्गशीर्ष की शुक्ल षष्ठी को सुब्रह्मण्य, चम्पा या स्कन्द षष्ठी कहा जाता है। ठंडी भोर और पकती फसल की सोंधी सुगंध के बीच यह तिथि सेनापति कार्तिकेय के तेज का उत्सव है। श्रद्धालु प्रातः स्नान कर पीले पुष्प, दीप, मिठाई, खिलौना-रथ और स्वर्णाभूषण अर्पित करते हुए “ॐ स्कन्दाय नमः” मंत्र का 108 जप करते हैं। पुराणों में वर्णित है कि इसी दिन कुमार ने तारकासुर का संहार किया था; अतः यह पूजन रोग, भय और दरिद्रता को दूर कर साहस, ऊर्जा और विजय का वरदान देता है। मार्गशीर्ष की पावन ऋतु में मनाया जाने वाला यह व्रत साधक को नई चेतना और लक्ष्य-सिद्धि का संकल्प प्रदान करता है।