जनवरी की सर्द हवा में उत्साह का ताप महसूस होता है जब राष्ट्र सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती मनाता है, जिसे अब ‘पराक्रम दिवस’ के नाम से भी जाना जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के तेजस्वी सेनानी नेताजी ने ‘आज़ाद हिन्द फ़ौज’ गठित कर पूरी दुनिया को भारत की अदम्य इच्छाशक्ति दिखा दी। उनका अमर नारा—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”—आज भी नस-नस में जोश भर देता है। इस दिन विद्यालयों में वक्तृत्व प्रतियोगिताएँ, देशभक्ति गीत और झाँकियाँ आयोजित होती हैं; युवा रक्तदान शिविर लगाकर तथा तिरंगा यात्राएँ निकालकर नेताजी के साहस का अनुकरण करते हैं। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले आने वाला यह दिवस हमें याद दिलाता है कि सच्ची आज़ादी संकल्प, अनुशासन और निर्भीक नेतृत्व से ही सम्भव होती है, और यही संदेश जनवरी के ठिठुरते मौसम में गर्मजोशी घोल देता है।