माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाई जाने वाली सकट चौथ, जिसे वक्रतुण्डी चतुर्थी, माही चौथ या तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है, संतान की दीर्घ आयु और आरोग्य के लिए समर्पित व्रत है। जनवरी की ठिठुरती हवाओं के बीच, जब मकर संक्रांति की पतंगें अब भी आकाश में मंडरा रही होती हैं, माताएँ भोर से निराहार रहकर गणपति की आराधना करती हैं। पीले वस्त्रों से सजे श्रीगणेश को तिल-गुड़, धूप, घी, रोली, कलावा और सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं। संध्या बेला में पूजा के पश्चात चंद्रदेव को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। परम्परा कहती है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने भी श्रीकृष्ण के निर्देश पर यही व्रत किया था, जिससे इसकी महिमा और अधिक बढ़ जाती है।