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महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती

2 मार्च 2027 · मंगलवार माघ, कृष्ण दशमी

फाल्गुन माह 2027 में महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती कब है?

संक्षिप्त उत्तर

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती 2027 कब है?

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती 2027 मंगलवार, 2 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती की तिथि माघ, कृष्ण दशमी है। महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:20 – 08:40 तक रहेगा।

दिनांक2 मार्च 2027
तिथिमाघ, कृष्ण दशमी
पूजा मुहूर्त06:20 – 08:40
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, कृष्ण दशमीफाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवतामहर्षि दयानन्द सरस्वती
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रमूलसिद्धि
संक्षिप्त परिचय

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती का महत्व और उत्सव

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती माघ, कृष्ण दशमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन महर्षि दयानन्द सरस्वती की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण दशमी
नक्षत्रमूल
योगसिद्धि
करणवणिज
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:44 – 05:32 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:20 – 08:40 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:46 – 12:33 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:26 – 17:13 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:12 – 18:24 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:05 – 16:32 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 02 Mar 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:44–05:32
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:20–08:40
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:46 – 12:33
तिथि समाप्त 03 Mar 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:12–18:24

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती — महत्व, कथा और परंपरा

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती मनाई जाती है। दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे। उन्होंने समाज में फैली बाल विवाह, सती प्रथा जैसी समाजिक बुराईयों को समाप्त करने के काफी प्रयास किए। वेदों से प्रेरणा लेकर स्वामी दयानंद सरस्वती ने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया था। इसके साथ ही 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी। इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, ऋग्वेद भाष्य, यजुर्वेद भाष्य, संस्कारविधि, पञ्चमहायज्ञविधि, आर्याभिविनय, गोकरूणानिधि, भ्रांतिनिवारण, अष्टाध्यायीभाष्य, वेदांगप्रकाश, संस्कृतवाक्यप्रबोध, व्यवहारभानु आदि पुस्तकें लिखी हैं जो आज भी हमें राह दिखाती हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती जी की देहांत सन् 1883 को दीपावली के दिन संध्या के समय हुआ।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, कृष्ण दशमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमहर्षि दयानन्द सरस्वती
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)माघ
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन माघ माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती 2 मार्च 2027 (मंगलवार) को है।
महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती माघ, कृष्ण दशमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।