महालक्ष्मी जयंती देवी लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं और तभी से उन्हें धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। यह पावन दिवस माँ महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि तथा ऐश्वर्य की कामना करते हैं। पूजन के लिए प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर घर की साफ-सफाई की जाती है और संध्या के समय दीप प्रज्वलित कर पूजा की जाती है। माँ लक्ष्मी को कमल का पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और मिठाई अर्पित की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य, सुख और सौभाग्य का वास होता है। यह दिन हमें परिश्रम, सदाचार और संतुलित जीवन के महत्व का भी स्मरण कराता है, क्योंकि माँ लक्ष्मी की स्थायी कृपा उन्हीं पर बनी रहती है जो धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हैं।