माघ शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाने वाली स्कन्द षष्ठी दक्षिण भारत की आस्था में केन्द्रीय स्थान रखती है। मान्यता है कि इसी दिन कुमार कार्तिकेय ने घोर राक्षस तारकासुर का संहार कर देवताओं को भयमुक्त किया था। इस विजय की स्मृति में भक्त स्कन्द, मुरुगन, सुब्रमण्यम नामधारी देवता के साथ-साथ शिव-पार्वती का भी पूजन करते हैं। उत्तर भारत में कार्तिकेय को गणेश का अग्रज कहा जाता है, जबकि दक्षिण में उन्हें छोटा भ्राता माना जाता है—दोनों ही दृष्टियाँ मात-पिता के वात्सल्य को दर्शाती हैं। षष्ठी तिथि स्वयं कार्तिकेय को प्रिय कही गई है, इसलिए इसे कौमारिकी भी पुकारते हैं। इस दिन अभिषेक, लाल पुष्प, गुड़-चने का नैवेद्य और “ॐ शरवनभवाय नमः” जप करने से साहस बढ़ता है, विघ्न मिटते हैं और मनचाहा कार्य शीघ्र सिद्ध होता है।