माघ की शीतल रातें जब धीरे-धीरे बसंत का संकेत देने लगती हैं, तब कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आने वाली मासिक शिवरात्रि विशेष प्रभावी मानी जाती है। यद्यपि सोमवार स्वयं शिव-आराधना का दिन है, फिर भी हर माह की यह तिथि महादेव को अतिप्रिय कही गई है। गरुड़ पुराण निर्देश देता है कि एक दिन पूर्व त्रयोदशी को शिवालय में दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें और चतुर्दशी को निराहार रहकर जल, दूध, घी, शक्कर, दही व शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें। रुद्राक्ष की माला, ताजे बिल्व-पत्र तथा भांग-धतूरा अर्पित करना शिव-तोष का सरल मार्ग है। लोक-विश्वास है कि मासिक शिवरात्रि का उपवास कन्याओं को मनचाहा वर प्रदान करता है, विवाह में आ रही रुकावटें दूर करता है, और साधक को स्थिर मन व आध्यात्मिक बल भी देता है।