माघ हिन्दू पंचांग का ग्यारहवाँ मास है, जो प्रायः 15 जनवरी से 13 फरवरी तक रहता है। हाड़-कँपाती ठंड धीरे-धीरे बसंत की दस्तक में बदलने लगती है, और इसी महीने बसंत पंचमी, शततिला एकादशी व गणेश जयन्ती जैसे उत्सव घर-घर में रौनक भरते हैं। पद्म-पुराण के अनुसार, प्रयागराज के संगम पर कल्पवास का पुण्य इस काल में सर्वाधिक फलदायी माना गया है; मान्यता है कि ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, रुद्र और आदित्य इसी अवसर पर संगम की ओर गमन करते हैं। निर्णय-सिंधु में भी माघ-स्नान का विशेष महत्त्व बताया गया है—कहा गया है कि गंगा-जल में डुबकी लगाने से तन-मन शुद्ध होता है। इसी अवधि में भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप तथा श्रीकृष्ण की काले तिल से पूजा कर शनि-दोष से राहत पाई जाती है। खिचड़ी, घृत, हल्दी, गुड़ व तिल का दान करने पर “अक्षय-पुण्य” प्राप्त होता है।