हिंदू धर्म में माघ मास को अत्यंत पवित्र और साधना के लिए उत्तम माना गया है। इसी महीने में आने वाली गुप्त नवरात्रि साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह ही माघ और आषाढ़ मास में दो गुप्त नवरात्रियाँ मनाई जाती हैं, लेकिन इनका स्वरूप साधना-प्रधान होता है। माघ गुप्त नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होकर नवमी तिथि तक चलती है। इन नौ दिनों में दस महाविद्याओं—मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगुलामुखी, मातंगी और कमला देवी—की पूजा का विशेष विधान है। शास्त्रों में इसे गुप्त सिद्धियों व तांत्रिक साधनाओं का श्रेष्ठ काल बताया गया है। इस दौरान साधक कठोर नियम, ब्रह्मचर्य और विशेष पूजन विधियों का पालन कर देवी कृपा और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।