आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला जयापार्वती, या विजया पार्वती व्रत, मालवा क्षेत्र की महिलाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय पर्व है। वर्षा ऋतु की तरोताज़गी से भरे इस मास में रखा गया व्रत मन, तन और दांपत्य जीवन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। भविष्योत्तर पुराण बताता है कि माता पार्वती की कृपा पाने के लिए लिया गया यह संकल्प विवाहित और अविवाहित दोनों को अखंड सौभाग्य का वरदान देता है। कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने इसका रहस्य लक्ष्मी जी को बताया था। परंपराओं में कहीं यह व्रत एक दिन, तो कहीं पाँच दिन तक पूजन-कथा और उपवास सहित निभाया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे गणगौर या मंगला गौरी पर्वों में होता है।