तमिल पंचांग के अनुसार मार्ग़ळी मास के मूल नक्षत्र के दिन हनुमान जयंती मनायी जाती है। इस अवसर पर भक्त प्रातःस्नान के बाद अंजनिपुत्र का तिल तेल से अभिषेक कर सुंदरकाण्ड, हनुमान चालीसा और रामनाम का पाठ करते हैं। परंपरागत रूप से गरम वड़ामालाई और मक्खन‑शहद का भोग अर्पित किया जाता है, जिसे अत्यन्त फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि मार्ग़ळी की शांत, शीतल हवाओं में की गयी हनुमद‑भक्ति से शौर्य, आरोग्य और निष्ठा बढ़ती है। इस मास को धनुर्मास भी कहा जाता है; सूर्योदय‑पूर्व मंदिर‑दर्शन तथा गोदान करने से ग्रहदोष शांत होकर जीवन में रक्षा और विकास के द्वार खुलते हैं।