भक्तिकाल के प्रमुख संतों में से एक चैतन्य महाप्रभु का जन्म फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, अर्थात होलिका दहन के दिन, बंगाल के नवद्वीप नगर में हुआ था। वे वैष्णव परंपरा में भक्ति योग के महान प्रचारक और भक्तिकाल के प्रमुख संत-कवियों में गिने जाते हैं। उनके अनुयायी इस पूर्णिमा को ‘गौर पूर्णिमा’ के रूप में मनाते हैं, जो उनकी जयंती का ही उत्सव है। श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु अपनी दिव्य स्वर्णिम आभा के कारण गौरांग, गौर हरि और गौर सुंदर जैसे नामों से भी प्रसिद्ध हैं। चैतन्य महाप्रभु ने अपने उपदेशों और भक्ति आंदोलन के माध्यम से जन-जन के हृदय को गहराई से प्रभावित किया। अपने समय में उनके समान लोकमानस को प्रभावित करने वाला आचार्य विरले ही हुआ है। उनके द्वारा प्रचारित प्रेम, भक्ति और संकीर्तन की परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।