हिंदू पंचांग में आषाढ़ वर्ष का चौथा महीना है। इसी अवधि के साथ वर्षा ऋतु भी अपने आगमन का संकेत देती है। पंचांग के प्रत्येक मास का नाम उस पूर्णिमा पर निर्धारित होता है जब चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो— वही नक्षत्र मास का नाम बन जाता है। आषाढ़ का नामकरण पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों से जुड़ा है, क्योंकि इस महीने की पूर्णिमा पर चंद्रमा इन्हीं नक्षत्रों में विचरण करता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है, जबकि इस मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।