आज की तिथि
आज की तिथि, पंचांग के पाँचो अंग, सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्र-सूर्य राशि, वैदिक घड़ी और कालचक्र — सब एक स्थान पर, आपके शहर के अनुसार।
स्थान और सूर्योदय के अनुसार पंचांग लोड हो रहा है।
आज की तिथि क्या है?
आज का पंचांग
हिंदू पंचांग के अनुसार आज की तिथि क्या है?
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आज का नक्षत्र
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कृत्तिका नक्षत्र के बारे में और पढ़ें →आज का राहु काल, मुहूर्त और चौघड़िया
आज का राहु काल और मुहूर्त
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आज क्या करें?
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आज की त्वरित जानकारी
कैलेंडर में जाने से पहले — आज और कल की मुख्य तिथि, संवत और चौघड़िया एक नज़र में।
आज की चौघड़िया
☀ दिन की चौघड़िया
🌙 रात की चौघड़िया
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी
1 दिन = 60 घटी। 1 घटी ≈ 24 मिनट।
1 मुहूर्त = 2 घटी = 48 मिनट। दिन में 30 मुहूर्त।
दिन के 4 + रात के 4 = 8 प्रहर। सूर्योदय/सूर्यास्त से विभाजित।
घटी, पल और विपल की जानकारी - वैदिक घड़ी क्या है ?
वैदिक घड़ी के अनुसार, घटी, पल और विपल समय की सूक्ष्म इकाइयाँ हैं जो पंचांग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एक दिन में 60 घटी होती हैं, प्रत्येक घटी लगभग 24 मिनट के बराबर होती है। एक घटी में 60 पल होते हैं, और एक पल में 60 विपल होते हैं। ये इकाइयाँ वैदिक समय के सूक्ष्म से विराट कालचक्र को समझने में मदद करती हैं।
वर्तमान वैदिक समय की गणना सूर्योदय से की जा रही है…
सूक्ष्म से विराट कालचक्र
श्रीमद्भागवत 3.11 पर आधारित — त्रुटि से ब्रह्मा की आयु तक का काल।
आगामी त्योहार और व्रत-उपवास
अगले कुछ प्रमुख व्रत, त्योहार और विशेष तिथियाँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज की तिथि कैसे निकाली जाती है?
तिथि सूर्य और चंद्रमा के सायन देशांतर के अंतर को लाहिरी अयनांश से शोधित करके, प्रत्येक 12° पर एक तिथि गिनकर निकाली जाती है। सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि उस दिन की तिथि मानी जाती है।
क्या तिथि हर शहर में अलग होती है?
हाँ, सूर्योदय और चंद्र स्थिति स्थान-विशिष्ट हैं। इसलिए तिथि, राहु काल और प्रहर शहर के अनुसार बदल सकते हैं।
वैदिक घड़ी में घटी-पल-विपल क्या हैं?
1 दिन = 60 घटी, 1 घटी = 60 पल, 1 पल = 60 विपल। गणना सूर्योदय से आरंभ होती है।
प्रहर और मुहूर्त में क्या अंतर है?
मुहूर्त = 48 मिनट (निश्चित)। प्रहर = दिन या रात का ¼ भाग (ऋतु अनुसार बदलता है, इसलिए हमेशा 3 घंटे नहीं होता)।
यह page किस स्रोत से गणना करता है?
astronomy-engine (NASA JPL DE405/406 ग्रह-चंद्र-सूर्य गणना) + लाहिरी चित्रपक्ष अयनांश। तिथि/नक्षत्र/योग/करण सूर्योदय के समय computed हैं।
2026 में अधिक मास कब है?
2026 में अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक है। इस कारण रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दीपावली आदि ~20 दिन आगे खिसक गए हैं।
