मंदिरों से संबंधित रोचक तथ्य(65)

भारत और पााकिस्तान के जैसलमेर बार्डर पर स्थित तनोट माता का प्रसिद्द मंदिर है, इन्हें हिंगलाज माँ का स्वरुप माना गया है जिनका मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। 1971 के युद्ध के समय पाकिस्तान की तरफ से यहाँ लगभग 3000 बम गिराये गए थे जिनमे से मंदिर परिसर में 450 बम गिरे थे, तब मंदिर परिसर के अन्दर गिरा एक भी बम नहीं फटा था और यहाँ के सभी लोग माँ के आशीर्वाद से बिलकुल सुरक्षित थे, बीएसएफ के जवानों और अन्य श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर की काफी मान्यता है।

भारत और पााकिस्तान के जैसलमेर बार्डर पर स्थित तनोट माता का प्रसिद्द मंदिर है, इन्हें हिंगलाज माँ का स्वरुप माना गया है जिनका मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। 1971 के युद्ध के समय पाकिस्तान की तरफ से यहाँ लगभग 3000 बम गिराये गए थे जिनमे से मंदिर परिसर में 450 बम गिरे थे, तब मंदिर परिसर के अन्दर गिरा एक भी बम नहीं फटा था और यहाँ के सभी लोग माँ के आशीर्वाद से बिलकुल सुरक्षित थे, बीएसएफ के जवानों और अन्य श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर की काफी मान्यता है।

पद्म पुराण के अनुसार एक बार जब ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री यज्ञ में सही समय पर नहीं पहुँच पायी थीं, तब ब्रह्मा जी नें एक स्थानीय बाला से विवाह किया था। यह देख कर ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री ने उन्‍हें यह श्राप दिया था कि देवता होने के बाद भी कभी उनकी पूजा नहीं होगी। इन्होनें श्राप दिया था कि ब्रह्मा जी की पूजा सिर्फ पुष्कर में ही होगी, और उनका यदि कोई दुसरा मंदिर बना तो मंदिर बनाने वाला कभी सुखी नहीं रहेगा। यही कारण है की पुरे भारत में पुष्‍कर झील के किनारे ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है।

पद्म पुराण के अनुसार एक बार जब ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री यज्ञ में सही समय पर नहीं पहुँच पायी थीं, तब ब्रह्मा जी नें एक स्थानीय बाला से विवाह किया था। यह देख कर ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री ने उन्‍हें यह श्राप दिया था कि देवता होने के बाद भी कभी उनकी पूजा नहीं होगी। इन्होनें श्राप दिया था कि ब्रह्मा जी की पूजा सिर्फ पुष्कर में ही होगी, और उनका यदि कोई दुसरा मंदिर बना तो मंदिर बनाने वाला कभी सुखी नहीं रहेगा। यही कारण है की पुरे भारत में पुष्‍कर झील के किनारे ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है।

राजस्थान के किराडू मंदिर को श्रापित माना जाता है, यहाँ पांच मंदिरों की खूबसूरत श्रृंखला है। इन मंदिरों में एक मंदिर भगवान श्री विष्णु का और बाकी के चार मंदिर शिवजी के हैं। वर्षों पहले एक साधू तीर्थ-भ्रमण के लिये जा रहे थे, तब उन्होंने इस गाँव के लोगों से अपने कुछ शिष्यों की देखभाल करने की विनती की। लेकिन जब साधू वापस आये तो उनके शिष्य किसी प्रकार की देखभाल ना होने के कारण बीमार हो गए थे, तब साधू नें यहाँ ऐसा श्राप दिया था कि जो भी शाम ढलने के बाद यहाँ रुकता है वह पत्थर बन जाता है।

राजस्थान के किराडू मंदिर को श्रापित माना जाता है, यहाँ पांच मंदिरों की खूबसूरत श्रृंखला है। इन मंदिरों में एक मंदिर भगवान श्री विष्णु का और बाकी के चार मंदिर शिवजी के हैं। वर्षों पहले एक साधू तीर्थ-भ्रमण के लिये जा रहे थे, तब उन्होंने इस गाँव के लोगों से अपने कुछ शिष्यों की देखभाल करने की विनती की। लेकिन जब साधू वापस आये तो उनके शिष्य किसी प्रकार की देखभाल ना होने के कारण बीमार हो गए थे, तब साधू नें यहाँ ऐसा श्राप दिया था कि जो भी शाम ढलने के बाद यहाँ रुकता है वह पत्थर बन जाता है।

राजस्थान के पुष्कर जिले में ऊँची पहाड़ी पर देवी सावित्री का मंदिर है, इन्हें माँ सरस्वती का ही रूप माना गया है। इस मंदिर में पुरुष बाहर से ही देवी के दर्शन कर सकते हैं, पुरुषों का मंदिर के अंदर प्रवेश करना वर्जित है। मान्यता है कि ब्रह्माजी को पुष्कर में श्राप देने के बाद देवी सावित्री इस पर्वत पर जाकर बस गईं थी। इन्होंने भगवान विष्णु को भी ब्रह्माजी की गायत्री से विवाह का साक्षी होने के वजह से पत्नी से वियोग का शाप दिया था।

राजस्थान के पुष्कर जिले में ऊँची पहाड़ी पर देवी सावित्री का मंदिर है, इन्हें माँ सरस्वती का ही रूप माना गया है। इस मंदिर में पुरुष बाहर से ही देवी के दर्शन कर सकते हैं, पुरुषों का मंदिर के अंदर प्रवेश करना वर्जित है। मान्यता है कि ब्रह्माजी को पुष्कर में श्राप देने के बाद देवी सावित्री इस पर्वत पर जाकर बस गईं थी। इन्होंने भगवान विष्णु को भी ब्रह्माजी की गायत्री से विवाह का साक्षी होने के वजह से पत्नी से वियोग का शाप दिया था।

मेंहदीपुरी बाला जी मंदिर में प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की प्रतिमायें हैं, यहां हर दिन 2 बजे प्रेतराज सरकार के दरबार में पेशी होती है और ऊपरी सायों को दूर किया जाता है। यहाँ मंदिर के किसी भी तरह के प्रसाद को ना आप किसी को दे सकते हैं और ना ही यहां के प्रसाद को आप घर ले जा सकते है। यहां तक की कोई भी खाने-पीने की चीज और सुंगधित वस्तुएं आप यहां से घर नहीं लेकर जा सकते।

मेंहदीपुरी बाला जी मंदिर में प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की प्रतिमायें हैं, यहां हर दिन 2 बजे प्रेतराज सरकार के दरबार में पेशी होती है और ऊपरी सायों को दूर किया जाता है। यहाँ मंदिर के किसी भी तरह के प्रसाद को ना आप किसी को दे सकते हैं और ना ही यहां के प्रसाद को आप घर ले जा सकते है। यहां तक की कोई भी खाने-पीने की चीज और सुंगधित वस्तुएं आप यहां से घर नहीं लेकर जा सकते।

राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाड़ियों के बीच मेहंदीपुर बालाजी का दिव्य मंदिर है, यहाँ श्री बजरंगबली बाल रूप में भक्तों का कल्याण करते हैं। मंदिर में स्थित श्री बालाजी की मूर्ति में बायीं ओर एक छेद है जिससे लगातार जल बहता रहता है। इस जल का स्‍तोत्र आज तक पता नहीं लग पाया है, लेकिन यहाँ दर्शन करने वाले लोग श्री बालाजी महाराज के इस जल को चमत्कारी मानते हैं और इस जल का प्रयोग बुरी नजरों से बचाव और बाधाओं को दूर करने के लिए करते हैं।

राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाड़ियों के बीच मेहंदीपुर बालाजी का दिव्य मंदिर है, यहाँ श्री बजरंगबली बाल रूप में भक्तों का कल्याण करते हैं। मंदिर में स्थित श्री बालाजी की मूर्ति में बायीं ओर एक छेद है जिससे लगातार जल बहता रहता है। इस जल का स्‍तोत्र आज तक पता नहीं लग पाया है, लेकिन यहाँ दर्शन करने वाले लोग श्री बालाजी महाराज के इस जल को चमत्कारी मानते हैं और इस जल का प्रयोग बुरी नजरों से बचाव और बाधाओं को दूर करने के लिए करते हैं।

उज्जैन का श्री काल भैरव मंदिर लगभग छह हजार साल पुराना माना जाता है। यहां विशिष्ट मंत्रों के द्वारा बाबा को अभिमंत्रित कर मदिरा का पान कराया जाता है, बाबा के मुंह से मदिरा का कटोरा लगाने के बाद मदिरा धीरे-धीरे गायब हो जाती है। एक अंग्रेज अधिकारी ने इस मंदिर की जांच भी कराई थी और प्रतिमा के आसपास की जगह की खुदाई भी करवाई थी, लेकिन अंत में वह भी बाबा के इस चमत्कार के आगे नतमस्तक हो गया था। विशेष अवसरों पर प्रशासन की ओर से भी बाबा को यहाँ मदिरा चढ़ाई जाती है।

उज्जैन का श्री काल भैरव मंदिर लगभग छह हजार साल पुराना माना जाता है। यहां विशिष्ट मंत्रों के द्वारा बाबा को अभिमंत्रित कर मदिरा का पान कराया जाता है, बाबा के मुंह से मदिरा का कटोरा लगाने के बाद मदिरा धीरे-धीरे गायब हो जाती है। एक अंग्रेज अधिकारी ने इस मंदिर की जांच भी कराई थी और प्रतिमा के आसपास की जगह की खुदाई भी करवाई थी, लेकिन अंत में वह भी बाबा के इस चमत्कार के आगे नतमस्तक हो गया था। विशेष अवसरों पर प्रशासन की ओर से भी बाबा को यहाँ मदिरा चढ़ाई जाती है।

मध्यप्रदेश के मालवा में नलखेड़ा से 15 किलोमीटर दूर ग्राम गड़ियाघाट में माँ दुर्गा का एक प्राचीन मंदिर है, यहाँ वर्षों से कालीसिंध नदी के पानी से अखंड ज्योत जल रही है। यहाँ माता के सामने रखे एक दिए में पानी डालने से यह अपने-आप तैलीय हो जाता है और यह दिया ऐसे ही जलता रहता है। यह क्रम लगातार तब तक चलता रहता है जब तक की वर्षा ऋतु नहीं आ जाती, क्योंकि हर साल यह मंदिर वर्षा ऋतु में कालीसिंध नदी में डूब जाता है।

मध्यप्रदेश के मालवा में नलखेड़ा से 15 किलोमीटर दूर ग्राम गड़ियाघाट में माँ दुर्गा का एक प्राचीन मंदिर है, यहाँ वर्षों से कालीसिंध नदी के पानी से अखंड ज्योत जल रही है। यहाँ माता के सामने रखे एक दिए में पानी डालने से यह अपने-आप तैलीय हो जाता है और यह दिया ऐसे ही जलता रहता है। यह क्रम लगातार तब तक चलता रहता है जब तक की वर्षा ऋतु नहीं आ जाती, क्योंकि हर साल यह मंदिर वर्षा ऋतु में कालीसिंध नदी में डूब जाता है।

तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के 400 वर्ष प्राचीन राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में यहां पर किसी के नहीं होने पर आवाजें सुनाई देती हैं। निस्तब्ध निशा में यहां स्थापित मूर्तियों से बोलने की आवाजें आती हैं, मध्य-रात्रि में जब लोग यहां से गुजरते हैं तो उन्हें यह आवाजें सुनाई पड़ती हैं। इस मंदिर में दस महाविद्याओं काली, त्रिपुर भैरवी, धुमावती, तारा, छिन्न मस्ता, षोडसी, मातंगी, कमला, उग्र तारा, भुवनेश्वरी की मूर्तियां स्थापित हैं।

तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध बिहार के 400 वर्ष प्राचीन राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर में यहां पर किसी के नहीं होने पर आवाजें सुनाई देती हैं। निस्तब्ध निशा में यहां स्थापित मूर्तियों से बोलने की आवाजें आती हैं, मध्य-रात्रि में जब लोग यहां से गुजरते हैं तो उन्हें यह आवाजें सुनाई पड़ती हैं। इस मंदिर में दस महाविद्याओं काली, त्रिपुर भैरवी, धुमावती, तारा, छिन्न मस्ता, षोडसी, मातंगी, कमला, उग्र तारा, भुवनेश्वरी की मूर्तियां स्थापित हैं।

लखनऊ शहर से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर बांदा और चित्रकूट के मध्य भूरत कूप नाम का एक अद्भुत कुंवा है, इस कुंवे का वर्णन तुलसीदासजी ने रामचरित मानस में भी किया है। मान्यता है कि भरत जी ने प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के लिये लायी गयी सभी सामंग्रियों को इसी कुंवे में छोड़ दिया था। तब से लेकर आज तक इस कुएं के पानी से स्नान करने के बाद कुष्ठ रोग एवं अन्य असाध्य रोग ठीक होते हुए देखे गए हैं। दूर-दूर से यहां पर लोग इस अद्‍भुत कुएं के पानी से स्नान करने के लिए आते हैं।

लखनऊ शहर से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर बांदा और चित्रकूट के मध्य भूरत कूप नाम का एक अद्भुत कुंवा है, इस कुंवे का वर्णन तुलसीदासजी ने रामचरित मानस में भी किया है। मान्यता है कि भरत जी ने प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के लिये लायी गयी सभी सामंग्रियों को इसी कुंवे में छोड़ दिया था। तब से लेकर आज तक इस कुएं के पानी से स्नान करने के बाद कुष्ठ रोग एवं अन्य असाध्य रोग ठीक होते हुए देखे गए हैं। दूर-दूर से यहां पर लोग इस अद्‍भुत कुएं के पानी से स्नान करने के लिए आते हैं।

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