मंदिरों से संबंधित रोचक तथ्य(65)

केरल के कोल्लम जिले में स्थित श्री कोत्तानकुलांगरा देवी का यह प्राचीन स्वयंभू मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में महिलाओं और किन्नरों के लिए पूजा करने की कोई रोक-टोक नहीं है, लेकिन पुरुषों के लिए एक विशेष नियम है—यदि कोई पुरुष यहाँ देवी की पूजा-अर्चना करना चाहता है, तो उसे महिलाओं की तरह संपूर्ण सोलह श्रृंगार करना पड़ता है। यहाँ आने वाले पुरुष न केवल साड़ी पहनते हैं, बल्कि गहने, मेकअप और बालों में गजरा भी सजाते हैं। मंदिर की इस अनूठी परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु इसे देवी के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतीक मानते हैं। हर साल यहाँ चाम्याविलक्कू त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें सैकड़ों पुरुष पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ महिलाओं के वेश में देवी का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं। इस दौरान मंदिर में पुरुषों के लिए विशेष रूप से मेकअप रूम भी बनाए जाते हैं, जहाँ वे स्वयं को इस पावन अनुष्ठान के लिए तैयार कर सकते हैं।

केरल के कोल्लम जिले में स्थित श्री कोत्तानकुलांगरा देवी का यह प्राचीन स्वयंभू मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में महिलाओं और किन्नरों के लिए पूजा करने की कोई रोक-टोक नहीं है, लेकिन पुरुषों के लिए एक विशेष नियम है—यदि कोई पुरुष यहाँ देवी की पूजा-अर्चना करना चाहता है, तो उसे महिलाओं की तरह संपूर्ण सोलह श्रृंगार करना पड़ता है। यहाँ आने वाले पुरुष न केवल साड़ी पहनते हैं, बल्कि गहने, मेकअप और बालों में गजरा भी सजाते हैं। मंदिर की इस अनूठी परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु इसे देवी के प्रति समर्पण और भक्ति का प्रतीक मानते हैं। हर साल यहाँ चाम्याविलक्कू त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें सैकड़ों पुरुष पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ महिलाओं के वेश में देवी का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं। इस दौरान मंदिर में पुरुषों के लिए विशेष रूप से मेकअप रूम भी बनाए जाते हैं, जहाँ वे स्वयं को इस पावन अनुष्ठान के लिए तैयार कर सकते हैं।

सैकड़ों वर्षों से हिमाचल प्रदेश स्थित ज्वाला देवी मंदिर में नौ अनोखी ज्वालाएँ निरंतर प्रज्वलित हैं। इन्हें माँ महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजीदेवी के रूप में पूजा जाता है। इन प्राकृतिक ज्वालाओं का रहस्य जितना वैज्ञानिक है, उतना ही आध्यात्मिक भी। मंदिर प्रांगण में कदम रखते ही भक्तों को दिव्य ऊर्जा का एहसास होता है, मानो देवियाँ स्वयं अपनी अग्नि से आशीर्वाद प्रदान कर रही हों।

सैकड़ों वर्षों से हिमाचल प्रदेश स्थित ज्वाला देवी मंदिर में नौ अनोखी ज्वालाएँ निरंतर प्रज्वलित हैं। इन्हें माँ महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजीदेवी के रूप में पूजा जाता है। इन प्राकृतिक ज्वालाओं का रहस्य जितना वैज्ञानिक है, उतना ही आध्यात्मिक भी। मंदिर प्रांगण में कदम रखते ही भक्तों को दिव्य ऊर्जा का एहसास होता है, मानो देवियाँ स्वयं अपनी अग्नि से आशीर्वाद प्रदान कर रही हों।

काशी विश्वनाथ मंदिर में महाराजा रणजीत सिंह ने एक टन सोने का दान किया था, इसी सोने से मंदिर के छत्रों पर सोना चढ़ाया गया था।

काशी विश्वनाथ मंदिर में महाराजा रणजीत सिंह ने एक टन सोने का दान किया था, इसी सोने से मंदिर के छत्रों पर सोना चढ़ाया गया था।

विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर कम्बोडिया में स्थित अंगकोर वाट हैं, यह मंदिर 162.6 हेक्टेयर में बना है।

विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर कम्बोडिया में स्थित अंगकोर वाट हैं, यह मंदिर 162.6 हेक्टेयर में बना है।

ज्वाला देवी मंदिर में सदियों से 9 प्राकृतिक ज्वालाएं जल रही हैं, इन 9 ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से पूजा जाता है।

ज्वाला देवी मंदिर में सदियों से 9 प्राकृतिक ज्वालाएं जल रही हैं, इन 9 ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से पूजा जाता है।

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