मंदिरों से संबंधित रोचक तथ्य(65)

पूरा बृहदीस्वर मंदिर कठोर ग्रेनाईट व सैंडस्टोन की चट्टानों से बनाया गया है, ग्रेनाईट पत्थर का सबसे समीपवर्ती स्रोत मंदिर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतनी लम्बी दूरी से इतनी बड़ी मात्रा में और विशाल आकार के पत्थरों को मंदिर निर्माण स्थल तक कैसे लाया गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। मंदिर के आस-पास कोई पहाड़ भी नहीं है, जिससे पत्थर लिए जाने की सम्भावना हो।

पूरा बृहदीस्वर मंदिर कठोर ग्रेनाईट व सैंडस्टोन की चट्टानों से बनाया गया है, ग्रेनाईट पत्थर का सबसे समीपवर्ती स्रोत मंदिर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतनी लम्बी दूरी से इतनी बड़ी मात्रा में और विशाल आकार के पत्थरों को मंदिर निर्माण स्थल तक कैसे लाया गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। मंदिर के आस-पास कोई पहाड़ भी नहीं है, जिससे पत्थर लिए जाने की सम्भावना हो।

बृहदीस्वर मंदिर में 12 फीट ऊँचा शिवलिंग स्थापित है, मंदिर के प्रवेशद्वार के पास स्थापित नंदी की विशाल मूर्ति भी एक अद्भुत आश्चर्य है। 20,000 किलो वजनी नंदी की यह मूर्ति 16 फीट लम्बी और 13 फीट ऊँची है, जिसे एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है।

बृहदीस्वर मंदिर में 12 फीट ऊँचा शिवलिंग स्थापित है, मंदिर के प्रवेशद्वार के पास स्थापित नंदी की विशाल मूर्ति भी एक अद्भुत आश्चर्य है। 20,000 किलो वजनी नंदी की यह मूर्ति 16 फीट लम्बी और 13 फीट ऊँची है, जिसे एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है।

बृहदीस्वर मंदिर के शिखर तक 80 टन वजनी पत्थर कैसे ले जाया गया, यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है।  ऐसा माना जाता है कि 1.6 किलोमीटर लम्बा एक रैंप बनाया गया था, जिस पर इंच दर इंच खिसकाते हुए इसे मंदिर के शिखर पर ले जाकर लगाया गया।

बृहदीस्वर मंदिर के शिखर तक 80 टन वजनी पत्थर कैसे ले जाया गया, यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि 1.6 किलोमीटर लम्बा एक रैंप बनाया गया था, जिस पर इंच दर इंच खिसकाते हुए इसे मंदिर के शिखर पर ले जाकर लगाया गया।

बृहदीस्वर मंदिर को बृहदेश्वर मंदिर और राजराजेस्वर मन्दिर या राजराजेस्वरम नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे ऊँचा मन्दिर (मुख्य शिखर की ऊंचाई 61 मीटर ) है। इसके शिखर पर लगे हुए पत्थर कुम्बम का वजन 80,000 किलो है। यह मंदिर 16 फीट ऊँचे ठोस चबूतरे पर बना हुआ है।

बृहदीस्वर मंदिर को बृहदेश्वर मंदिर और राजराजेस्वर मन्दिर या राजराजेस्वरम नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया का सबसे ऊँचा मन्दिर (मुख्य शिखर की ऊंचाई 61 मीटर ) है। इसके शिखर पर लगे हुए पत्थर कुम्बम का वजन 80,000 किलो है। यह मंदिर 16 फीट ऊँचे ठोस चबूतरे पर बना हुआ है।

1000 वर्ष पुराना बृहदीस्वर शिव मंदिर तमिलनाडु प्रदेश के तंजावुर में स्थित है। भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक बृहदीस्वरर मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राज राजा चोल प्रथम ने स्वप्न में दैवीय प्रेरणा प्राप्त होनेपर करवाया था। बृहदीस्वरर मंदिर को UNESCO World Heritage Site लिस्ट में स्थान दिया गया है।

1000 वर्ष पुराना बृहदीस्वर शिव मंदिर तमिलनाडु प्रदेश के तंजावुर में स्थित है। भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक बृहदीस्वरर मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राज राजा चोल प्रथम ने स्वप्न में दैवीय प्रेरणा प्राप्त होनेपर करवाया था। बृहदीस्वरर मंदिर को UNESCO World Heritage Site लिस्ट में स्थान दिया गया है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रतिदिन 5,000 रसोइये और 300 सहयोगी काम करते हैं और इनके द्वारा बनाया गया पूरा प्रसाद यहाँ रोज बाँट दिया जाता है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रतिदिन 5,000 रसोइये और 300 सहयोगी काम करते हैं और इनके द्वारा बनाया गया पूरा प्रसाद यहाँ रोज बाँट दिया जाता है।

तिरुपति में बना भगवान विष्णु का मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है, 10वीं सदी के बने इस मंदिर में लगभग 30,000 भक्त प्रतिदिन दर्शन करने आते हैं और यहाँ प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ 60 लाख रूपये का चढ़ावा चढ़ता है।

तिरुपति में बना भगवान विष्णु का मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है, 10वीं सदी के बने इस मंदिर में लगभग 30,000 भक्त प्रतिदिन दर्शन करने आते हैं और यहाँ प्रतिदिन लगभग 3 करोड़ 60 लाख रूपये का चढ़ावा चढ़ता है।

तमिलनाडु के तंजौर में स्थित भगवान शिव का वृहदेश्वर मंदिर ग्रेनाइट के पत्थरों से बना है, इस मंदिर का शिखर 80 टन ग्रेनाइट के पत्थरों से बना है जिसे राजा चोल ने 1004 से 1009 ईस्वी में बनवाया था। भगवान शिव को समर्पित बृहदेश्वर मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट नि‍र्मि‍त है।

तमिलनाडु के तंजौर में स्थित भगवान शिव का वृहदेश्वर मंदिर ग्रेनाइट के पत्थरों से बना है, इस मंदिर का शिखर 80 टन ग्रेनाइट के पत्थरों से बना है जिसे राजा चोल ने 1004 से 1009 ईस्वी में बनवाया था। भगवान शिव को समर्पित बृहदेश्वर मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट नि‍र्मि‍त है।

श्री बालाजी की मूर्ति पर पचाई कर्पूरम चढ़ाया जाता है जो कर्पूर मिलाकर बनाया जाता है। यदि इसे किसी साधारण पत्थर पर चढाया जाए, तो वह कुछ ही समय में चटक जाता है, लेकिन मूर्ति पर इसका प्रभाव नहीं होता है।

श्री बालाजी की मूर्ति पर पचाई कर्पूरम चढ़ाया जाता है जो कर्पूर मिलाकर बनाया जाता है। यदि इसे किसी साधारण पत्थर पर चढाया जाए, तो वह कुछ ही समय में चटक जाता है, लेकिन मूर्ति पर इसका प्रभाव नहीं होता है।

18वीं शताब्दी में वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को 12 वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था। कहा जाता है कि उस समय एक राजा ने 12 लोगों को मृत्युदंड देकर मंदिर की दीवारों पर लटका दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और अशांति फैल गई। मान्यता है कि ठीक उसी समय वेंकटेश्वर स्वामी स्वयं प्रकट हुए, और इस दैवीय हस्तक्षेप के कारण यह घटना रहस्यमय बन गई। आज भी इस प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल उठते हैं, लेकिन यह कथा मंदिर की दिव्यता और भगवान वेंकटेश्वर की अलौकिक उपस्थिति का प्रतीक मानी जाती है।

18वीं शताब्दी में वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को 12 वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था। कहा जाता है कि उस समय एक राजा ने 12 लोगों को मृत्युदंड देकर मंदिर की दीवारों पर लटका दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और अशांति फैल गई। मान्यता है कि ठीक उसी समय वेंकटेश्वर स्वामी स्वयं प्रकट हुए, और इस दैवीय हस्तक्षेप के कारण यह घटना रहस्यमय बन गई। आज भी इस प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल उठते हैं, लेकिन यह कथा मंदिर की दिव्यता और भगवान वेंकटेश्वर की अलौकिक उपस्थिति का प्रतीक मानी जाती है।

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