मंदिरों से संबंधित रोचक तथ्य(65)

चार धामों में से एक रामेश्‍वरम धाम में श्रद्धालुओं की यात्रा तभी संपन्‍न होती है जब वे इसके निकट स्थित अन्‍य तीर्थस्‍थलों के दर्शन करते हैं। रामेश्‍वरम् के पास हनुमान कुंड, अमृत वाटिका और बराम तीर्थ जैसे दार्शनिक और धार्मिक स्‍थल भी हैं। रामेश्‍वरम के प्रमुख आकर्षणों में एक रामसेतु भी है, यह तमिलनाडु के रामानाथुन जिले में स्थित है। हालांकि यहां तक पर्यटकों के जाने पर स्थानीय प्रशासन की तरफ से रोक है लेकिन धनुषकोडि पहुंचकर आप रामायण की कहानी का साक्षात प्रमाण देख सकते हैं।

चार धामों में से एक रामेश्‍वरम धाम में श्रद्धालुओं की यात्रा तभी संपन्‍न होती है जब वे इसके निकट स्थित अन्‍य तीर्थस्‍थलों के दर्शन करते हैं। रामेश्‍वरम् के पास हनुमान कुंड, अमृत वाटिका और बराम तीर्थ जैसे दार्शनिक और धार्मिक स्‍थल भी हैं। रामेश्‍वरम के प्रमुख आकर्षणों में एक रामसेतु भी है, यह तमिलनाडु के रामानाथुन जिले में स्थित है। हालांकि यहां तक पर्यटकों के जाने पर स्थानीय प्रशासन की तरफ से रोक है लेकिन धनुषकोडि पहुंचकर आप रामायण की कहानी का साक्षात प्रमाण देख सकते हैं।

श्री रामेश्वर जी का मन्दिर एक हज़ार फुट लम्बा, छ: सौ पचास फुट चौड़ा तथा एक सौ पच्चीस फुट ऊँचा है। कहते हैं कि पीड़ा से व्‍यथित कोई भक्‍त यदि रामेश्‍वरम के दर्शन करता है तो उसकी पीड़ा शिवजी और श्रीराम के आशीर्वाद से दूर हो जाती है, भगवान शिव पर आधारित शिवपुराण में भी रामेश्‍वरम धाम की महिमा का उल्लेख मिलता है। लोक मान्यता है कि यहां आने पर भक्‍तों का पुर्नजन्‍म होता है और सातों पीढियों के पाप भी कट जाते हैं।

श्री रामेश्वर जी का मन्दिर एक हज़ार फुट लम्बा, छ: सौ पचास फुट चौड़ा तथा एक सौ पच्चीस फुट ऊँचा है। कहते हैं कि पीड़ा से व्‍यथित कोई भक्‍त यदि रामेश्‍वरम के दर्शन करता है तो उसकी पीड़ा शिवजी और श्रीराम के आशीर्वाद से दूर हो जाती है, भगवान शिव पर आधारित शिवपुराण में भी रामेश्‍वरम धाम की महिमा का उल्लेख मिलता है। लोक मान्यता है कि यहां आने पर भक्‍तों का पुर्नजन्‍म होता है और सातों पीढियों के पाप भी कट जाते हैं।

रामनाथ स्वामी मंदिर में बना गलियारा विश्व का सबसे बड़ा गलियारा है, यह पूरा गलियारा 3850 फीट में फैला हुआ है। रामेश्वरम मंदिर में बने गलियारे में 1212 खम्बे हैं और यह सभी 1212 खम्भे एक ही बिंदु पर जा कर मिलते हैं।

रामनाथ स्वामी मंदिर में बना गलियारा विश्व का सबसे बड़ा गलियारा है, यह पूरा गलियारा 3850 फीट में फैला हुआ है। रामेश्वरम मंदिर में बने गलियारे में 1212 खम्बे हैं और यह सभी 1212 खम्भे एक ही बिंदु पर जा कर मिलते हैं।

चार धामों में से एक रामेश्वरम में 24 ऐसे कुएँ हैं, जिनका जल असाधारण रूप से मीठा है, जबकि यह क्षेत्र समुद्र के निकट स्थित है। प्रचलित कथाओं के अनुसार, जब भगवान राम अपनी वानर सेना के साथ समुद्र पार करने की तैयारी कर रहे थे, तब सेना को प्यास से व्याकुल देख उन्होंने अपने दिव्य बाणों से इन कुओं की रचना की। यह भी माना जाता है कि इन पवित्र कुओं के जल में स्नान करने या इसे ग्रहण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। यही कारण है कि भक्त यहाँ आकर इन चमत्कारिक जल स्रोतों के दर्शन और आचमन को मोक्षदायी मानते हैं, और इनकी महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है।

चार धामों में से एक रामेश्वरम में 24 ऐसे कुएँ हैं, जिनका जल असाधारण रूप से मीठा है, जबकि यह क्षेत्र समुद्र के निकट स्थित है। प्रचलित कथाओं के अनुसार, जब भगवान राम अपनी वानर सेना के साथ समुद्र पार करने की तैयारी कर रहे थे, तब सेना को प्यास से व्याकुल देख उन्होंने अपने दिव्य बाणों से इन कुओं की रचना की। यह भी माना जाता है कि इन पवित्र कुओं के जल में स्नान करने या इसे ग्रहण करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। यही कारण है कि भक्त यहाँ आकर इन चमत्कारिक जल स्रोतों के दर्शन और आचमन को मोक्षदायी मानते हैं, और इनकी महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है।

तिरुपति बालाजी मंदिर में एक जलता हुआ दीपक है जो सदियों से जल रहा है, इसमें ना तो कभी तेल डाला जाता ना ही घी लेकिन कोई नहीं जानता की ये दीपक कब और किसके द्वारा जलाया गया था।

तिरुपति बालाजी मंदिर में एक जलता हुआ दीपक है जो सदियों से जल रहा है, इसमें ना तो कभी तेल डाला जाता ना ही घी लेकिन कोई नहीं जानता की ये दीपक कब और किसके द्वारा जलाया गया था।

तिरुपति बालाजी मंदिर में लगी मूर्ति भी काफी अद्भुत है जब इसे मंदिर के अंदर से देखा जाता है तो वो बीच में लगती है लेकिन अगर बाहर से देखें तो लगता है ये दायीं तरफ है।

तिरुपति बालाजी मंदिर में लगी मूर्ति भी काफी अद्भुत है जब इसे मंदिर के अंदर से देखा जाता है तो वो बीच में लगती है लेकिन अगर बाहर से देखें तो लगता है ये दायीं तरफ है।

तिरुपति बालाजी मंदिर में एक छड़ी है, मान्यता है कि यही वो छड़ी है जिससे भगवान की ठोड़ी पर चोट लगी थी और इसी के बाद से लोग इनके ऊपर हल्दी का लेप लगाने लगे, भगवान के बाल रूप में उन्हें मारने के लिए भी इसी छड़ी का उपयोग किया जाता था।

तिरुपति बालाजी मंदिर में एक छड़ी है, मान्यता है कि यही वो छड़ी है जिससे भगवान की ठोड़ी पर चोट लगी थी और इसी के बाद से लोग इनके ऊपर हल्दी का लेप लगाने लगे, भगवान के बाल रूप में उन्हें मारने के लिए भी इसी छड़ी का उपयोग किया जाता था।

बृहदेश्वर मंदिर में उत्कीर्ण लेखों के अनुसार मंदिर के मुख्य वास्तुविद कुंजर मल्लन राजा पेरुन्थचन थे, जिनके वंश के लोग आज भी वास्तुशास्त्र, आर्किटेक्चर का कार्य करते हैं।

बृहदेश्वर मंदिर में उत्कीर्ण लेखों के अनुसार मंदिर के मुख्य वास्तुविद कुंजर मल्लन राजा पेरुन्थचन थे, जिनके वंश के लोग आज भी वास्तुशास्त्र, आर्किटेक्चर का कार्य करते हैं।

बृहदीस्वर मंदिर में जलने वाले दीयों के लिए घी की अबाधित पूर्ति के हेतु सम्राट राज राजा ने मंदिर को 4000 गायें, 7000 बकरियाँ, 30 भैंसे व 2500 एकड़ जमीन दान की थी।  तब मंदिर व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए 192 कर्मचारी रखे गये थे।

बृहदीस्वर मंदिर में जलने वाले दीयों के लिए घी की अबाधित पूर्ति के हेतु सम्राट राज राजा ने मंदिर को 4000 गायें, 7000 बकरियाँ, 30 भैंसे व 2500 एकड़ जमीन दान की थी। तब मंदिर व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए 192 कर्मचारी रखे गये थे।

बृहदीस्वर मंदिर को बनाने में 1,30,000 टन ग्रेनाईट पत्थर का प्रयोग हुआ है। इतने विशाल मंदिर को बनाने में सिर्फ रिकॉर्ड 7 साल लगे थे। यह मंदिर 6 बड़े भूकम्पों का सामना कर चुका है, पर इसे किसी भी प्रकार का नुक्सान नहीं हुआ।

बृहदीस्वर मंदिर को बनाने में 1,30,000 टन ग्रेनाईट पत्थर का प्रयोग हुआ है। इतने विशाल मंदिर को बनाने में सिर्फ रिकॉर्ड 7 साल लगे थे। यह मंदिर 6 बड़े भूकम्पों का सामना कर चुका है, पर इसे किसी भी प्रकार का नुक्सान नहीं हुआ।

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