गौ-माता से संबंधित रोचक तथ्य(53)

रोज़ तैंतीस कोटि देवताओं के मंदिर जाना सबके लिए संभव नहीं, लेकिन मान्यता है कि गौ माता के दर्शन से ही उन सभी देवों की कृपा मिलती है।

रोज़ तैंतीस कोटि देवताओं के मंदिर जाना सबके लिए संभव नहीं, लेकिन मान्यता है कि गौ माता के दर्शन से ही उन सभी देवों की कृपा मिलती है।

कई बार शुभ कार्य अटक जाते हैं या अनेक प्रयासों के बाद भी सफल नहीं होते। मान्यता है कि गौ माता के कान में समस्या बताने से रुका काम बन जाता है।

कई बार शुभ कार्य अटक जाते हैं या अनेक प्रयासों के बाद भी सफल नहीं होते। मान्यता है कि गौ माता के कान में समस्या बताने से रुका काम बन जाता है।

शास्त्रों में वर्णित है कि कई देवी-देवताओं ने गौ माता की सेवा करने के लिए ही धरती पर अवतार लिए। गौ माता को चलता-फिरता मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि उनके भीतर तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।

शास्त्रों में वर्णित है कि कई देवी-देवताओं ने गौ माता की सेवा करने के लिए ही धरती पर अवतार लिए। गौ माता को चलता-फिरता मंदिर भी कहा जाता है, क्योंकि उनके भीतर तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।

कहा जाता है कि महान विद्वान और धर्मरक्षक गौकर्ण जी महाराज का जन्म गौ माता के गर्भ से ही हुआ था। इसी से यह मान्यता और भी गहरी हो जाती है कि गौ माता सुखों की असल दाता हैं, जो अपनी कोख से ही दिव्य विभूतियों को जन्म देने में समर्थ हैं।

कहा जाता है कि महान विद्वान और धर्मरक्षक गौकर्ण जी महाराज का जन्म गौ माता के गर्भ से ही हुआ था। इसी से यह मान्यता और भी गहरी हो जाती है कि गौ माता सुखों की असल दाता हैं, जो अपनी कोख से ही दिव्य विभूतियों को जन्म देने में समर्थ हैं।

मान्यता है कि गौ माता के चारों चरणों के बीच से होकर परिक्रमा करने से व्यक्ति निडर हो जाता है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने गोचारण लीला करके यह परंपरा स्थापित की, जिसे लोग गोपाष्टमी के रूप में मनाते हैं।

मान्यता है कि गौ माता के चारों चरणों के बीच से होकर परिक्रमा करने से व्यक्ति निडर हो जाता है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने गोचारण लीला करके यह परंपरा स्थापित की, जिसे लोग गोपाष्टमी के रूप में मनाते हैं।

कहते हैं कि जिसकी भाग्यरेखा सोई हो, उसे हथेली पर गुड़ रखकर गौ माता को जीभ से चटाना चाहिए। मान्यता है कि गौ माता के ऐसा करने से भाग्यरेखा जाग जाती है।

कहते हैं कि जिसकी भाग्यरेखा सोई हो, उसे हथेली पर गुड़ रखकर गौ माता को जीभ से चटाना चाहिए। मान्यता है कि गौ माता के ऐसा करने से भाग्यरेखा जाग जाती है।

गौ माता से प्राप्त होने वाले दूध, घी, मक्खन, दही, गोबर और गोमूत्र के मेल को ही पंचगव्य कहा जाता है, जिसे हज़ारों रोगों की दवा माना गया है। प्राचीन मान्यता है कि इसका सेवन करने से कई कठिन बीमारियाँ भी ठीक हो जाती हैं।

गौ माता से प्राप्त होने वाले दूध, घी, मक्खन, दही, गोबर और गोमूत्र के मेल को ही पंचगव्य कहा जाता है, जिसे हज़ारों रोगों की दवा माना गया है। प्राचीन मान्यता है कि इसका सेवन करने से कई कठिन बीमारियाँ भी ठीक हो जाती हैं।

गौ माता की पीठ पर उभरे कुबड़ को सूर्यकेतु नाड़ी का स्थान कहते हैं। मान्यता है कि सुबह कुछ देर उस कुबड़ पर हाथ फेरने से कई शारीरिक बीमारियाँ दूर होती हैं।

गौ माता की पीठ पर उभरे कुबड़ को सूर्यकेतु नाड़ी का स्थान कहते हैं। मान्यता है कि सुबह कुछ देर उस कुबड़ पर हाथ फेरने से कई शारीरिक बीमारियाँ दूर होती हैं।

गौ माता की एक आँख में सूर्य और दूसरी में चंद्र का वास माना जाता है। एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी-देवताओं को भोग चढ़ाने का पुण्य फल मिलता है। यह हमारी धार्मिक परंपरा में गाय के प्रति विशेष सम्मान का प्रमाण है।

गौ माता की एक आँख में सूर्य और दूसरी में चंद्र का वास माना जाता है। एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी-देवताओं को भोग चढ़ाने का पुण्य फल मिलता है। यह हमारी धार्मिक परंपरा में गाय के प्रति विशेष सम्मान का प्रमाण है।

ऐसी भी मान्यता है कि जिस स्थान पर गौ माता प्रसन्नता से रंभाने लगती हैं, वहाँ देवी-देवता प्रसन्न होकर पुष्पवर्षा करते हैं। इसके अलावा, गौ माता के गोबर को अत्यंत पवित्र माना गया है, जिसमें देवी लक्ष्मी का निवास बताया जाता है।

ऐसी भी मान्यता है कि जिस स्थान पर गौ माता प्रसन्नता से रंभाने लगती हैं, वहाँ देवी-देवता प्रसन्न होकर पुष्पवर्षा करते हैं। इसके अलावा, गौ माता के गोबर को अत्यंत पवित्र माना गया है, जिसमें देवी लक्ष्मी का निवास बताया जाता है।

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