कहा जाता है कि गौ माता के खुरों में नागदेवता का वास होता है। इसी कारण जहाँ-जहाँ गाय विचरण करती है, वहाँ सांप और बिच्छू जैसे जीवों का आगमन नहीं होता। यह मान्यता गाय की पवित्रता के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है।
परंपरा के अनुसार, गाय के गले में घंटी बाँधना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि जब यह घंटी बजती है तो वह मानो गौ आरती का स्वर बन जाती है। साथ ही, ऐसा विश्वास है कि जो व्यक्ति गौ माता की पूजा और सेवा करता है, उसकी सारी विपदाएँ गौ माता स्वयं हर लेती है।
मान्यता है कि जहाँ भी गौ माता आनंदपूर्वक खड़ी होकर चैन की साँस लेती हैं, उस स्थान के सभी वास्तु दोष स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इस विश्वास के पीछे विचार यह है कि गाय अपनी पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा से वातावरण को शुद्ध कर देती है।