गौ-माता से संबंधित रोचक तथ्य(53)

महात्मा गांधी ने भी कहा है कि गोवंश की रक्षा करना, ईश्वर की सारी मूक सृष्टि की रक्षा करने जैसा है। भारत की खुशहाली और प्रगति गाय के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार, गाय प्रसन्नता और उन्नति की जननी है और कई मायनों में वह हमारी जन्मदात्री माँ से भी श्रेष्ठ स्थान रखती है, क्योंकि वह जीवन भर हमें पोषण देती है।

महात्मा गांधी ने भी कहा है कि गोवंश की रक्षा करना, ईश्वर की सारी मूक सृष्टि की रक्षा करने जैसा है। भारत की खुशहाली और प्रगति गाय के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार, गाय प्रसन्नता और उन्नति की जननी है और कई मायनों में वह हमारी जन्मदात्री माँ से भी श्रेष्ठ स्थान रखती है, क्योंकि वह जीवन भर हमें पोषण देती है।

स्वामी दयानन्द सरस्वती के अनुसार, एक गाय अपने जीवन में तकरीबन 4,10,440 लोगों के लिए एक वक़्त का भोजन जुटाती है—चाहे वह दूध हो, घी हो या खेतीबाड़ी में मदद। जबकि यदि उसी गाय को मार दिया जाए, तो केवल 80 लोगों का पेट भरेगा।

स्वामी दयानन्द सरस्वती के अनुसार, एक गाय अपने जीवन में तकरीबन 4,10,440 लोगों के लिए एक वक़्त का भोजन जुटाती है—चाहे वह दूध हो, घी हो या खेतीबाड़ी में मदद। जबकि यदि उसी गाय को मार दिया जाए, तो केवल 80 लोगों का पेट भरेगा।

महर्षि अरविंद ने गौ माता को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धात्री बताते हुए उसे कामधेनु की उपाधि दी है। उनका कहना था कि गौ माता के बारे में नकारात्मक विचार रखना या उसका अनिष्ट चिंतन करना, पराभव का कारण बन सकता है।

महर्षि अरविंद ने गौ माता को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धात्री बताते हुए उसे कामधेनु की उपाधि दी है। उनका कहना था कि गौ माता के बारे में नकारात्मक विचार रखना या उसका अनिष्ट चिंतन करना, पराभव का कारण बन सकता है।

पंडित मदनमोहन मालवीय चाहते थे कि भारतीय संविधान की पहली धारा ही सम्पूर्ण गौवंश हत्या निषेध की बात करे। उनका मानना था कि अगर हम गायों की रक्षा करेंगे, तो गायें हमारी रक्षा करेंगी।

पंडित मदनमोहन मालवीय चाहते थे कि भारतीय संविधान की पहली धारा ही सम्पूर्ण गौवंश हत्या निषेध की बात करे। उनका मानना था कि अगर हम गायों की रक्षा करेंगे, तो गायें हमारी रक्षा करेंगी।

कवि रसखान ने लिखा— “जो पशु हों तो कहा बसु मेरो, चरों नित नंद की धेनु मंझारन।” वे प्रार्थना करते हैं कि पशु जन्म भी मिले, तो नंद बाबा की गायों के बीच ही मिले।

कवि रसखान ने लिखा— “जो पशु हों तो कहा बसु मेरो, चरों नित नंद की धेनु मंझारन।” वे प्रार्थना करते हैं कि पशु जन्म भी मिले, तो नंद बाबा की गायों के बीच ही मिले।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा— “धेनुनामस्मि कामधेनु,” यानी गायों में मैं कामधेनु हूँ। इससे गाय का ऊँचा आध्यात्मिक स्थान स्पष्ट होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा— “धेनुनामस्मि कामधेनु,” यानी गायों में मैं कामधेनु हूँ। इससे गाय का ऊँचा आध्यात्मिक स्थान स्पष्ट होता है।

स्कंद पुराण में कहा गया है कि ‘गौ सर्वदेवमयी’ और ‘वेद सर्वगौमय’ हैं, जिसका अर्थ है कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है और वेद गाय में समाए हुए हैं। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए गुरु गोविंदसिंहजी ने भी गौमाता के प्रति अपना दृढ़ संकल्प प्रकट किया—उन्होंने कहा कि गौ माता का दु:ख मिटाने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे।

स्कंद पुराण में कहा गया है कि ‘गौ सर्वदेवमयी’ और ‘वेद सर्वगौमय’ हैं, जिसका अर्थ है कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है और वेद गाय में समाए हुए हैं। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए गुरु गोविंदसिंहजी ने भी गौमाता के प्रति अपना दृढ़ संकल्प प्रकट किया—उन्होंने कहा कि गौ माता का दु:ख मिटाने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे।

मान्यता है कि काली गाय की पूजा से नौ ग्रह शांत होते हैं। श्रद्धापूर्वक गौ पूजन करने वाले को शत्रुदोषों से मुक्ति मिलती है।

मान्यता है कि काली गाय की पूजा से नौ ग्रह शांत होते हैं। श्रद्धापूर्वक गौ पूजन करने वाले को शत्रुदोषों से मुक्ति मिलती है।

कहा जाता है कि अगर स्वस्थ गौ माता का गौमूत्र रोज़ाना—लगभग दो तोला—सात तह वाले कपड़े से छानकर पिया जाए, तो शरीर के तमाम रोग दूर हो जाते हैं। यह पारंपरिक मान्यता हमारे पूर्वजों के प्राकृतिक चिकित्सा ज्ञान की ओर इशारा करती है, जिसे आज भी बहुत से लोग मानते और अपनाते हैं।

कहा जाता है कि अगर स्वस्थ गौ माता का गौमूत्र रोज़ाना—लगभग दो तोला—सात तह वाले कपड़े से छानकर पिया जाए, तो शरीर के तमाम रोग दूर हो जाते हैं। यह पारंपरिक मान्यता हमारे पूर्वजों के प्राकृतिक चिकित्सा ज्ञान की ओर इशारा करती है, जिसे आज भी बहुत से लोग मानते और अपनाते हैं।

कहते हैं कि गौ माता जब किसी को वात्सल्य भरी नज़रों से देखती हैं, तो उन पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं। जो भी व्यक्ति उनकी सच्चे मन से सेवा या पूजा करता है, उसके जीवन से तमाम संकट दूर हो जाते हैं।

कहते हैं कि गौ माता जब किसी को वात्सल्य भरी नज़रों से देखती हैं, तो उन पर अपनी विशेष कृपा बरसाती हैं। जो भी व्यक्ति उनकी सच्चे मन से सेवा या पूजा करता है, उसके जीवन से तमाम संकट दूर हो जाते हैं।

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